कुछ अजनबी लोग हमारी ज़िन्दगी में हमे सिर्फ सबक देने आते है, सबक ये के कभी किसी पर अँधा विश्वास मत करो, और कर भी लो तो इतना करीब ना बनाओ के वो आस्तीन के साँप बन जाये ! ऐसे लोग इतने शातिर होते है इतना भरोसा दिलाते है अपनेपन का की हम चाह कर भी उनके लिए अलग धारणा नही बना सकते, इनके लिए रिश्ते सिर्फ "लाभ-हानि" का मात्र एक खेल होता है जब तक फायदा मिले निभाते रहो और नुक्सान का जरा सा आभास होते ही अँधेरे में गुल हो जाते है !
ऐसे लोग भगवान् की बनाई स्पेशल वाली कैटेगरी में आते है जिनका काम होता है बस "विश्वासघात करना" "रिश्तों को अपनी सुविधानुसार सेट रखना" "मासूमियत का नकाब पहने रखना" "रिश्तों में फुट डालना" जैसे और भी कई कामो में ये महारत हासिल किये होते है और ताज्जुब की बात ये है की ये सब करने के बाद भी इनके माथे पे शर्म की शिकन तक नही दिखती..
ऐसे इंसान सबकी ज़िन्दगी में एक बार तो दस्तक देते ही है और ज़िन्दगी भर की एक टीस दिल में छोड़ जाते है..
ये दीमक की तरह होते है जो धीरे धीरे रिश्तों की नीव हिलाते है और जबतक पता चलता है इनके बारे में तब तक काफी देर हो जाती है !
किसी ने पुछा था एक बार के ये सब करके इन्हें ख़ुशी क्यों मिलती है ?
मैंने कहा फ़िक्र मत करो भगवान् अक्सर हमें वही देता है जिसमे लोगो को "ख़ुशी" मिलती है :)
#देर_है_अँधेर_नहीं ~
रेखा सुथार

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