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सबक जो जीवन भर साथ रहे


बचपन में हमारे मोहल्ले में एक छोटी सी दुकान थी जब भी हमे चवन्नी या अठन्नी मिलती थी तो हम सीधे वही भागते थे ! एक दिन मैं एक रूपया लेकर गई वहा अठन्नी की चॉकलेट ली और अठन्नी वापस लेनी थी,उन अंकल को कम दिखने वजह से गल्ले से अठन्नी की जगह मुझे पाँच का सिक्का दे दिया.. ये देख कर मेरी और मेरी पूरी गैंग की ख़ुशी का ठिकाना ही नहीं रहा क्योंकि पाँच रुपये सबमे बंटने थे.. मैं सबसे पहले भाग के घर गई और बाहर मेरे दोस्त ये तय कर रहे थे के हम उन पैसो का क्या क्या लेंगे ! मैंने जाते ही वहा पापा को देखा तो बड़ी खुश हो के उन्हें सारी बात बताई "सोचा सरदार खुश होगा साबासि देगा"..  पर पापा ने ये जानते ही मेरा कान... नहीं नहीं हाथ पकड़ा और मुझे ले गए उसी दूकान पर वहा पैसे वापस दिलवाये और माफ़ी भी मंगवाई... मैं मुँह लटका के घर आयी सभी दोस्त हँस रहे थे मुझे देख कर, फिर पापा ने बहुत अच्छे से समझाया के कभी किसी की कमजोरी का गलत फायेदा मत उठाना क्या पता उसने कितनी मेहनत कर के वो पैसे कमाए होंगे !
ये किस्सा इसलिए याद आया की अभी कुछ दिन पहले शाम के समय मैं और मेरी सिस्टर रीटा नुक्कड़ पर एक अंकल से कुछ सामान लिया और बाकी के पैसे ले कर काफी आगे निकल गए फिर हमे पता चला उन्होंने हमे सौ रुपये ज्यादा दे दिए ये देखते ही हम तुरंत उनके पास गए और उन्हें वापस कर दिए, वो अंकल बहुत इमोशनल हो गए हाथ जोड़ने लगे फिर उन्होंने हमे थैंक यू बोला...

और हमने पापा को :)

रेखा ~

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