#इस_दुनिया_मे_शिकायत_करती_नज़रों_और_चीख़ती_हुई_खामोशी_से_खतरनाक_शायद_कुछ_नहीं_हो_सकता
वो स्टेशन पर खड़ी थी चेहरा पूरा सूजा हुआ सा और आँखें एकदम लाल पड़ी हुई थी। ऐसा चेहरा अक्सर जी भर के रोने के बाद ही होता हैं। ट्रैन के आने में अभी पाँच मिनट थे, वो सामने की तरफ आती-जाती ट्रेनों को लगातार एकटक देखे जा रही थी। वो अब भी भरी हुई थी अंदर से मानो अगर किसी ने कुछ पूछ लिया तो वो रो देगी।
तभी एक लड़का दौड़ा हुआ आया और उसके पास आकर खड़ा हो गया। वो उसकी तरफ नहीं देख रही थी।
लड़के ने उसका हाथ पकड़ कर उसे थोड़ा साईड में ले गया,उसने उसके दोनों हाथ पकड़े हुए थे लड़की अब भी चुप थी लड़का भी खामोशी से उसकी तरफ देख रहा था मानो उसकी नज़र उससे कह रही हो कि 'मत जाओ'..
लड़की की भीगी कतारों से अब बूँदें एक-एक करके बिखरने लगी (जब मन के भीतर सबकुछ बिखरा हो तो इन चंद बूंदों का बह जाना लाज़मी हैं)
लड़की ने हाथ छुड़ाने की कोशिश की मगर लड़के की मजबूत पकड़ से छुड़ा नहीं पायी।
ट्रैन आ चुकी थी लड़की ने लड़के की तरफ गुस्से और हैरानी भरी नज़रों से देखा अब लड़के ने हाथों को छोड़ दिया था। (ऐसी नज़रों से हम किसी को तभी देखते हैं जब हमारी खुद्दारी पर गहरी चोंट लगी हो और शिकायत करने के सारे लफ्ज़ खो चुके हो, तब लबों पर खामोशी की ज़ुबाँ ओढ़ लेना ही मुनासिब लगता हैं और लड़की ने शायद वही किया था)
लड़की ट्रेन में बैठ गयी एक बार भी पलट कर नहीं देखा,लड़का वही खड़ा भीगी आँखों से काफी देर तक ट्रेन को जाते हुए देखता रहा।
तभी एक लड़का दौड़ा हुआ आया और उसके पास आकर खड़ा हो गया। वो उसकी तरफ नहीं देख रही थी।
लड़के ने उसका हाथ पकड़ कर उसे थोड़ा साईड में ले गया,उसने उसके दोनों हाथ पकड़े हुए थे लड़की अब भी चुप थी लड़का भी खामोशी से उसकी तरफ देख रहा था मानो उसकी नज़र उससे कह रही हो कि 'मत जाओ'..
लड़की की भीगी कतारों से अब बूँदें एक-एक करके बिखरने लगी (जब मन के भीतर सबकुछ बिखरा हो तो इन चंद बूंदों का बह जाना लाज़मी हैं)
लड़की ने हाथ छुड़ाने की कोशिश की मगर लड़के की मजबूत पकड़ से छुड़ा नहीं पायी।
ट्रैन आ चुकी थी लड़की ने लड़के की तरफ गुस्से और हैरानी भरी नज़रों से देखा अब लड़के ने हाथों को छोड़ दिया था। (ऐसी नज़रों से हम किसी को तभी देखते हैं जब हमारी खुद्दारी पर गहरी चोंट लगी हो और शिकायत करने के सारे लफ्ज़ खो चुके हो, तब लबों पर खामोशी की ज़ुबाँ ओढ़ लेना ही मुनासिब लगता हैं और लड़की ने शायद वही किया था)
लड़की ट्रेन में बैठ गयी एक बार भी पलट कर नहीं देखा,लड़का वही खड़ा भीगी आँखों से काफी देर तक ट्रेन को जाते हुए देखता रहा।
पता नहीं किसने कहा था कि लड़के रोते नही
वो फुट-फुट के तो नहीं रोया मगर अपनी आँखों से गिरते आँसुओं को रोकने की तमाम फ़िज़ूल कोशिशें करता रहा।
वो फुट-फुट के तो नहीं रोया मगर अपनी आँखों से गिरते आँसुओं को रोकने की तमाम फ़िज़ूल कोशिशें करता रहा।
#किस्से_लोकल_के
Rekha Suthar
Rekha Suthar

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