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लोकल वाला इश्क



वो दोनों जेंट्स डब्बे में गेट पर खड़े थे। मैं वही सामने की सीट पर बैठी थी। लड़का दिखने में बेहद स्मार्ट और लड़की बाकमाल खूबसूरत थी।
पिछले चार स्टेशन से लड़की लगातार बोले जा रही थी एक पल भी चुप होने का नाम नहीं लिया मानों दोनों कई दिनों बाद मिले हो और लड़की को अपने बीते उन तमाम दिनों में हुई हर छोटी से बड़ी घटना लड़के को बतानी हैं।
लड़का चुप था बड़ी ही शिद्दत से लड़की की हर बात को गौर से सुन रहा था। लड़की बात करते-करते कभी उसके कंधे पर हाथ रख देती तो कभी हौले से उसकी उंगली अपनी उंगली में झकड़ लेती और इस सिचुएशन में लड़का थोड़ा सा घबराता इधर-उधर आँखे मटकाता और बड़ी ही नजाकत से वो कभी लड़की का हाथ अपने कंधे से हटाता तो कभी उसकी उंगली उसकी गिरफ्त से निकाल लाता। ये सिलसिला कई देर तक चलता रहा।
लड़के का ऐसे बार-बार उससे उंगली छुड़ा लेना लड़की को बुरा लगा,वो अचानक चुप हो गयी और अपने जेब से फ़ोन निकाल उसमें व्यस्त होने का नाटक करने लगी।
लड़का अब भी चुप था गेट की तरफ देख मुस्कुरा रहा था,और करीब दो मिनट बाद लड़के ने हलके से लड़की की चारों उंगलियों को अपनी उंगलियों में झकड़ लिया और उसका हाथ मजबूती से पकड़ लिया।
लड़की लड़के की तरफ प्यार से एकटक देखे जा रही थी, लड़का अब भी गेट की तरफ मुँह कर मुस्करा रहा था।
रोज़ की भागमभाग और रास्तों के झुंझलाहट भरे माहौल के बीच जब कुछ ऐसा मंजर सामने दिखता है तब "ज़िन्दगी को खूबसूरत" कहने में ज़ुबाँ कतराती नहीं हैं।
#किस्से_लोकल_के
#इश्कनामा
Rekha Suthar

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