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यही किस्से है जो मेरे हिस्से है


शाम को 6 बजे के आसपास लोकल में चढ़ने के लिए बस दरवाजे पर खड़े हो जाओ उसके बाद अंदर आपको कैसे जाना हैं किधर जाना हैं का फैसला पीछे और आगे खड़ी भयंकर भीड़ तय करती है।
उस भीड़ में अगर आप अपनी मुंडी हिला पा रहे है तो यकीन मानो खुशकिस्मत हो तुम 😂
और जब इतनी भीड़ में कोई सीट पर बैठी महिला/लड़की कह दे के बैठ जाओ मैं अगले स्टेशन पर उतर रही हूँ तो एकाएक मन से एक आवाज़ आती हैं
"बहन,अब रुलायेगी क्या" 🤣🤣🤣🤣
#किस्से_लोकल_के ❣️

रेखा सुथार

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