हमारी कोइनसिडेंटली मुलाक़ात हुई थी पहली ही मुलाक़ात में लगा कि हम दोनों के ख़यालात बहुत मिलतेजुलते है तो हमने दुबारा मिलना तय किया।
बहुत सालों से जानते है हम एकदूसरे को अक्सर मिलना भी होता था। बहुत गहरी दोस्ती तो नहीं थी लेकिन हम दोस्त अच्छे थे,लेकिन वक़्त के साथ धीरे-धीरे हमारी मुलाक़ात कम होने लगी उसकी वजह कुछ छोटी-छोटी बातें थी या यूं कहूं कि कुछ गलतफहमियां थी। वो गलतफहमियां बहुत बड़ी नहीं थी बात करने से शायद सुलझ जाती, लेकिन हम दोनों के दरमियान पनप रहे उस मनमुटाव लिए वो चंद सुनी-सुनाई बातें ही काफी थी।
उस समय इतनी समझ कहा थी कि किसी भी परेशानी का हल बात करने से निकल आता है ना कि बात बंद कर देने से और सुनी-सुनाई बातों पर कभी भी पूरी तरह से यकीन नहीं करना चाहिए।
ये मनमुटाव हमारा लंबे वक्त तक चलता रहा.. ऐसा भी नहीं था कि हमदोनों एकदूसरे के बारे में बुरा सोचती थी और हमने एकदूसरे से ना मिलने की कोई कसम भी न खाई थी बस ज़रा सी अनबन थी। दरअसल हम दोनों के बीच खामोशी की एक महीन दीवार खड़ी हो गयी थी जिसे हम दोनों ही तोडना चाह रही थी हम दोनों ही शायद एक मुलाक़ात के इंतजार में थी।
वो अक्सर मेरे बारे में म्युचुअल दोस्तों से बात करती थी उनसे कहती कि "अच्छा लिखती हूं मैं मन की बातें लिख देने से मन हल्का हो जाता है"।
ये भी सुनी-सुनाई बातें थी लेकिन इसपर दिल पूरी तरह से यकीन करना चाह रहा था।
मुझे नहीं पता कब,कहा और कैसे लेकिन मुझे हमेशा से यकीन था की हम दोनों किसी रोज़ ज़रूर मिलेंगे और उसदिन बैठकर सारे गीले-शिकवे दूर करेंगे और चाय के कप से उड़ते धुंए के साथ हमारे मन के अंदर बची वो थोड़ी बहुत कड़वाहट भी उस धुंए के साथ कही हवा में विलीन हो जाएगी।
मैं आदतन उसके हर जन्मदिन पर एक sms ज़रूर भेजती थी और उस sms का जवाब कभी नहीं आया था।
हमारी आंखरी बात शायद मेरे पिछले जन्मदिन पर हुई थी जब उसका मैसेज आया था -
- "Happy birthday Rekha"
मैं बहुत खुश हुई थी उसका मैसेज देखकर जवाब में मैंने थेंक यू लिखने की बजाय पूछा था - "तुम कैसी हो" ?
"मैं ठीक हूं" - उसने जवाब दिया
मैंने जवाब में एक स्माइली भेजी।
बस उसके बाद ना उसने कुछ लिखा ना मैंने.. हमारे दरमियान फिर से एक लंबे विराम ने जगह ले ली।
मैं बस ये जानकर खुश थी कि वो ठीक है खुश है... और शायद वो भी ऐसा ही सोचती होगी मेरे लिए ।
आज सुबह घर के सारे काम खत्म करके वॉट्सप ग्रुप्स में अनरीड मैसेज देख रही थी अचानक एक ग्रुप में तुम्हारी तस्वीर देखी मैं खुश हो गयी तुम अच्छी दिख रही थी हमेशा की तरह। तुम्हारी मुस्कान किसी का भी दिल जीत सकती है ये मैं तुम्हे अक्सर कहती थी...
तुम्हारी तस्वीर देख मेरी मुस्कराहट चेहरे पे फैली ही थी,लेकिन चंद ही सेकेंड में मेरे भीतर मानो सबकुछ बिखर गया जब तस्वीर के नीचे किसी ने लिखा 'RIP'
मेरा शरीर बिल्कुल ठंडा पड़ गया था ये पढ़कर मेरा मन इस बात को स्वीकार करने से सिरे से खारिज़ कर रहा था लेकिन वहा लगातार लिखे जा रहे 'RIP' देखकर मन सहम गया।
आज दो दिन हो गए है तुम्हे गए हुए दिल अब भी इस बात पे यकीन करने को राजी नहीं है... मैं सोच रही हूं क्या तुमने अपने आंखरी पलों में मुझे याद किया होगा ?
कितनी सारी बातें करनी थी यार तुमसे कितना कुछ बताना था तुमको.... वो जो छोटी सी गलतफहमी के शिकार थे हम दोनों उसे मिटाना था मुझे.. तुमसे मिलने के बाद से अभी तक के जीवन मे आये तमाम उतार-चढ़ाव के बारे में बताना था तुम्हे..
और सबसे जो ज़रूरी बात तुम्हे बतानी थी वो ये की 'तुम एक बहुत अच्छी नेकदिल इंसान हो' मैं कभी सपने में भी नहीं सोच सकती थी यार कि मुझे इस लाईन के आखिर में अब 'थी' लगाना पड़ेगा।
मुझे याद है तुमने पहली ही मुलाक़ात में मुझसे किसी बात पर कहा था की 'रेखा मैं जानती हूं कि आसान तो कुछ भी नहीं लेकिन मैं तुम्हे एकदिन बहुत अच्छे मुकाम पर देखना चाहती हूं' तो फिर रुकी क्यों नहीं यार ? अभी तो सफर शुरू ही हुआ था तुमने राह बदल दी ?
मैं किससे करू अब वो सारी बातें जो मुझे सिर्फ तुमको बतानी थी ?
तुम्हे तो जीत कर आगे बढ़ना आता था ना यार ? फिर ऐसा क्या हुआ कि तुमने एक छोटे से वायरस के सामने घुटने टेक दिए ?
यूं तो ज़िंदगी चलती रहेगी दोस्त लेकिन ये बात मुझे जीवन भर कचोटती रहेगी कि मैंने पहल क्यों नहीं कि तुमसे बात करने की क्यों मैं इस इंतज़ार में बैठी रही कि तुम पहले फ़ोन करोगी जबकि हम दोनों के पास एकदूसरे के नम्बर थे पता नहीं किस सही वक्त के इंतज़ार में थे हम ?
मेरे जीवन में तुम्हारे हिस्से की वो खाली जगह कभी न भर पाएगी।
तुम चाहे किसी भी दुनिया में रहो बस खुश रहना मेरी दोस्त 💛
************ रेखा_सुथार
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