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Showing posts from 2021

मेरे जीवन की डिक्शनरी में 'जाना' का पर्यायवाची हमेशा 'पीड़ा' लिखा रहेगा। एक अंतहीन यात्रा

ये तस्वीर मसूरी की सबसे ऊंची चोटी 'लाल टिब्बा' की हैं। पिछले साल लोकडाउन के ठीक पहले पूरे परिवार के साथ गए थे।  मसूरी के सारे स्थानीय जगह घूमने के बाद आखिर में लाल टिब्बा देखने की बारी थी। हमने अपनी प्राइवेट कार से लाल टिब्बा की और चढ़ाई शुरू करी। हालांकि की कई लोग ये चढ़ाई पैदल भी करना पसंद करते है लेकिन क्योंकि हम लोग बहुत थक गए थे तो कार से ही जाना तय किया। हमने मुश्किल से आधा किलोमीटर की ही चढ़ाई की होगी की आगे देखा गाड़ियों का पूरा जाम लगा हुआ था सुनने में आया कि ये जाम 3-4 घंटे तक खुलना नहीं है हमारी गाड़ी के पीछे और भी कई गाड़ियों की कतार लग गयी थी अब ना आगे जाने का रास्ता था ना पीछे। मुझे ढलते सूरज के साथ पहाड़ों की शाम की खूबसूरती को देखना बहुत अच्छा लगता है और ये मैं मिस नहीं करना चाहती थी। कोई भी साथ चलने को तैयार नहीं हुआ तो अपना मोबाईल लेकर मैं अकेले ही चल पड़ी। मुझे 4 किलोमीटर की चढ़ाई करनी थी और करीब एक किलोमीटर पार करके मुझे एहसास हुआ कि मैं कितनी बड़ी बेवकूफ हूं। मैंने साथ मे ना पैसे लिए और ना ही पीने को पानी रास्ते मे बीच मे कही कोई दुकान भी नहीं थी। थोड़ा आग...

मेरे जीवन में तुम्हारे हिस्से की वो खाली जगह कभी न भर पाएगी।

हमारी कोइनसिडेंटली मुलाक़ात हुई थी पहली ही मुलाक़ात में लगा कि हम दोनों के ख़यालात बहुत मिलतेजुलते है तो हमने दुबारा मिलना तय किया।  बहुत सालों से जानते है हम एकदूसरे को अक्सर मिलना भी होता था। बहुत गहरी दोस्ती तो नहीं थी लेकिन हम दोस्त अच्छे थे,लेकिन वक़्त के साथ धीरे-धीरे हमारी मुलाक़ात कम होने लगी उसकी वजह कुछ छोटी-छोटी बातें थी या यूं कहूं कि कुछ गलतफहमियां थी। वो गलतफहमियां बहुत बड़ी नहीं थी बात करने से शायद सुलझ जाती, लेकिन हम दोनों के दरमियान पनप रहे उस मनमुटाव लिए वो चंद सुनी-सुनाई बातें ही काफी थी।  उस समय इतनी समझ कहा थी कि किसी भी परेशानी का हल बात करने से निकल आता है ना कि बात बंद कर देने से और सुनी-सुनाई बातों पर कभी भी पूरी तरह से यकीन नहीं करना चाहिए।  ये मनमुटाव हमारा लंबे वक्त तक चलता रहा.. ऐसा भी नहीं था कि हमदोनों एकदूसरे के बारे में बुरा सोचती थी और हमने एकदूसरे से ना मिलने की कोई कसम भी न खाई थी बस ज़रा सी अनबन थी। दरअसल हम दोनों के बीच खामोशी की एक महीन दीवार खड़ी हो गयी थी जिसे हम दोनों ही तोडना चाह रही थी हम दोनों ही शायद एक मुलाक़ात के इंतजार म...

वो फिर दुबारा मुझे कभी नहीं दिखी..

वो हर सुबह 9.38 की फ़ास्ट लोकल में मिलती थी मुझे। रोज कुछ न कुछ नया लाती थी बेचने के लिए उसकी उम्र यही कोई 20-21 साल की होगी । एकदिन मैंने ही पूछा था उससे - 'तुम रोज-रोज नई-नई चीजें बेचने को कहा से लाती हो' ? उसने मुस्कराकर जवाब दिया - 'बेचने के लिए जो वो लोग देते है वही लाना पड़ता है ना दीदी'। मैं हर रोज चर्नी रोड स्टेशन से मेरी नियमित ट्रेन 9.38 की फ़ास्ट लोकल में चढ़ती और वो एक स्टेशन बाद मुम्बई सैंट्रल से। ट्रेन में चढ़ते ही वो अपना बेचने के लिए लाया हुआ सामान हैंगर में टांगती फिर कुछ पल रुककर वो मुझे तलाशती उसकी नज़रें मुझपर टिकते ही उसकी आँखें चहक उठती वैसे ही जैसे विदेश में कोई अपने देश का कोई शख्स मिल जाए तब कैसे बिना कोई जान पहचान के हम उन्हें देखकर चहक उठते है हमे बेवजह ही वो एकदम से अनजान इंसान अपना सा लगने लगता है। वो मुस्कराते चेहरे से इशारे में मुझे हेलो कहती और मैं भी उसे जवाब में एक मुस्कान दे देती फिर वो अपना सामान बेचने में मशगूल हो जाती और मैं फिर से  किताब पढ़ने में डूब जाती। शनिवार (second) को ऑफिस की छुट्टी होती है तो उसदिन एक साथ दो दिन की छु...

जैसलमेर के किले में बना ये आकर्षक रेस्टोरेंट और इसका लज़ीज़ खाना

अगर आप इटेलियन खाने के शौकीन है तो कभी आप जैसलमेर जाओ तो इस रेस्टोरेंट जिसका नाम है जैसल_इटली   के इटेलियन_फ़ूड को ज़रूर टेस्ट करे।  जब पूरा दिन घूमने-फिरने में निकल गया तो  शाम होते ही किले से नीचे की और लौटते हुए जोरो की भूख लगी मैं गूगल पर कोई आसपास अच्छा रेस्टोरेंट ढूंढ रही थी पर सारे अच्छे रेस्टोरेंट कुछ-कुछ दूरी पे थे बहुत थकने की वजह से मैं थोड़ी देर साईड में एक दुकान के सामने बैठी और वहा से रौशनदान किले को निहारने लगी बरसों से खड़ी मजूत दीवारें अभी भी कितनी मजबूती और शान लिए खड़ी है। वही बैठे मेरी नज़र ऊपर की और टंगे एक रेस्टोरेंट के बोर्ड पर पड़ी जिसका नाम था #jaisal_italy  मुझे क्यूरोसिटी हुई और मैं जल्दी से ऊपर सीढिया चढ़कर रेस्टोरेंट की तरफ गयी वहा नज़ारा देखकर मन खुशी से झूम उठा रूफटॉप रेस्टोरेंट से किले का व्यू ज़बरदस्त दिख रहा था। फिर भी हमें लगा नहीं था कि इस रेस्टोरेंट में इतना अच्छा इटालियन फ़ूड मिलेगा इसलिए हमने पहले एक पिज़ा ही ऑर्डर किया बाहर खुले में बैठने का मन हो रहा था लेकिन ...