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अधूरी ग़ज़ल


कागज़ पर ख़ामोश
बैठी एक अधूरी
ग़ज़ल उन रूठे हुए
लफ़्ज़ों की राह तक
रही है जो ज़रा सी
बात पर मुँह मोड़ गए
है,वैसे ही जैसे तुम गए
थे उस रोज़..
रेखा

Comments

jeasbe' said…
~Uffest Hai~
"कागज़ पर ख़ामोश
बैठी एक अधूरी
ग़ज़ल ..............
उन रूठे हुए
लफ़्ज़ों की राह तक
रही है जो ज़रा सी
बात पर मुँह मोड़ गए
है,वैसे ही जैसे तुम गए
थे उस रोज़.."
- रेखा
Rekha suthar said…
आपका कमेंट आते ही दिल खुश हो जाता है.. शुक्रिया jeasbe sir

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