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"मैं नहीं जानती कैसी हूँ मैं"

~


मैं नहीं जानती कैसी हूँ मैं

ना मैं शायर हूँ ना कवि हूँ मैं
लिखा जो कभी दिल को छु जाए
तो समझ लेना तेरे जैसी हूँ मैं

ना प्यार लिखती हूँ ना नफरत लिखती हूँ 
जो कभी पढ़ लो जज्बात तुम
तो समझ लेना तेरे जैसी हूँ मैं

ना सच लिखती हूँ ना झूठ लिखती हूँ 
जो जैसा दीखता है वैसा ही लिखती हूँ
दिख जाए जो सादगी लफ़्ज़ों की
तो समझ लेना तेरे जैसी हूँ मैं

ना जख्म लिखती हूँ ना दर्द लिखती हूँ
बेजुबां लबो की आवाज लिखती हूँ
जो सुन सको तुम भी वो ख़ामोशी 
तो समझ लेना तेरे जैसी हूँ मैं
रेखा ~

Comments

jeasbe' said…
Bohot Khoob Rekha~
Rekha suthar said…
Thank you so much jeasbe sir :)
Rekha suthar said…
बहुत बहुत शुक्रिया सर :)
Rewa Tibrewal said…
Wah sach kaha....jiskay bhi jaisi ho..ho bahut pyari
Rekha suthar said…
Aha.... thank you Rewa dee :D बस कुछ कुछ आप जैसी ही हूँ :)

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