हमारी कोइनसिडेंटली मुलाक़ात हुई थी पहली ही मुलाक़ात में लगा कि हम दोनों के ख़यालात बहुत मिलतेजुलते है तो हमने दुबारा मिलना तय किया। बहुत सालों से जानते है हम एकदूसरे को अक्सर मिलना भी होता था। बहुत गहरी दोस्ती तो नहीं थी लेकिन हम दोस्त अच्छे थे,लेकिन वक़्त के साथ धीरे-धीरे हमारी मुलाक़ात कम होने लगी उसकी वजह कुछ छोटी-छोटी बातें थी या यूं कहूं कि कुछ गलतफहमियां थी। वो गलतफहमियां बहुत बड़ी नहीं थी बात करने से शायद सुलझ जाती, लेकिन हम दोनों के दरमियान पनप रहे उस मनमुटाव लिए वो चंद सुनी-सुनाई बातें ही काफी थी। उस समय इतनी समझ कहा थी कि किसी भी परेशानी का हल बात करने से निकल आता है ना कि बात बंद कर देने से और सुनी-सुनाई बातों पर कभी भी पूरी तरह से यकीन नहीं करना चाहिए। ये मनमुटाव हमारा लंबे वक्त तक चलता रहा.. ऐसा भी नहीं था कि हमदोनों एकदूसरे के बारे में बुरा सोचती थी और हमने एकदूसरे से ना मिलने की कोई कसम भी न खाई थी बस ज़रा सी अनबन थी। दरअसल हम दोनों के बीच खामोशी की एक महीन दीवार खड़ी हो गयी थी जिसे हम दोनों ही तोडना चाह रही थी हम दोनों ही शायद एक मुलाक़ात के इंतजार म...